कप्तान कोहली की ये गलतियां ही चेन्नई टेस्ट न बचा पाने की उत्तरदायी होंगी

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इंग्लैंड क्रिकेट टीम भारतीय दौरे पर है और भारत एवं इंग्लैंड के मध्य पहला टेस्ट मैच चेन्नई में चल रहा है, जिसमें मेहमान टीम का पलड़ा भारी नजर आ रहा है। भारतीय टीम का पलड़ा मेहमान टीम के आगे लचर साबित हो रहा है। भारतीय टीम के पक्ष में न तो टाॅस ही था और न ही भारतीय टीम के द्वारा लिए जा रहे डीआरएस के फैसले, जिसका खामियाजा भारतीय टीम को भुगतना पड़ रहा है। बात की जाए यदि इंग्लैंड की बल्लेबाजी की तो उसमें मेहमान टीम के बल्लेबाजों ने जम कर भारतीय गेंदबाजों को छकाया और पहली पारी में 578 रन बनाए और वहीं भारतीय टीम ने मेहमान टीम के सामने पहली पारी में ही घुटने टेक दिए और 337 रन बनाकर ढेर हो गई, जिससे भारतीय टीम अब जीतने की उम्मीद से कम मैच बचाने की ही कोशिश कर रही है। वहीं मेहमान टीम के द्वारा पहली पारी में बनाए गए 578 रन के चलते या तो मैच जीत सकती है या तो फिर मैच ड्रा की ओर जा सकता है। यदि यहां से इंग्लैंड टीम मैच जीतती है तो इसके लिए उत्तरदायी भारतीय टीम की कमजोर रणनीति ही होगी, जिसके चलते भारतीय टीम चेन्नई टेस्ट गंवा रही है। आइये नजर डालते है भारतीय टीम की कुछ प्रमुख रणनीतिक गलतियों पर-

टीम द्वारा प्लेइंग इलेवन का चुनाव

भारत और इंग्लैंड के मध्य चेन्नई में मैच शुरू होने से पहले ही टीम प्रबंधन के फैसले पर सवाल उठना शुरू हो गए थे। स्पिनर कुलदीप यादव को चेन्नई टेस्ट में मैाका न देना और उनकी जगह रिजर्व खिलाड़ी शाहबाज नदीम को शामिल किया जाना। शाहबाज नदीम के द्वारा चेन्न्ई टेस्ट में कोई छाप नही छोड़ी गई और नदीम मेहमान टीम पर कोई दबाव नही बना सके नदीम अपना दूसरा टेस्ट मैच खेल रहे हैं। नदीम ने इस मैच में कुल 44 ओवर डाले हैं और केवल 2 विकेट ही ले सके हैं, जबकि चेन्नई की पिच स्पिनर्स को सपोर्ट करती है। कुलदीप यादव ने अपना आखिरी टेस्ट 2019 को खेला था। कुलदीप यादव को टीम में शामिल नही करने पर भारत के पूर्व ओपनर बल्लेबाज गौतम गंभीर एवं माइकल वाॅन जैसे दिग्गजों ने भी सवाल उठाए हैं।

डीआरएस लेने में कप्तान विराट कोहली से चूक

भरतीय कप्तान विराट कोहली डीआरएस लेने में अपने आप को असहज महसूस कर रहे हैं, इससे पहले भी महेंद्र सिंह धोनी की मौजूदगी में भी विराट डीआरएस लेने के लिए उन्ही पर निर्भर रहते थे क्योंकि डीआरएस लेने में धोनी को इसका माहिर माना जाता था आज कोहली को डीआरएस लेने में धोनी की कमी महसूस हो रही है धोनी को टेस्ट से सन्यास लिए लेबा समय हो गया है। चेन्नई टेस्ट में विराट ने तीन डीआरएस लिए और तीनों ही उनके खिलाफ रहे। दो डीआरएस तो कोहली ने दो ओवरों में लगातार लिए। डीआरएस खोने का परिणाम यह हुआ कि इंग्लैंड की पारी के दौरान कई ऐसे मौके आए जब लगा कि करीबी ममला हो सकता है और तब भारतीय कप्तान विराट के पास कोई विकल्प शेष नही बचा था, जिसके चलते उनको फील्ड अंपायरों के ही निर्णय पर संतोष करना पड़ा।

समय पर नई गेंद नही लेना

टीम इंडिया के पास दूसरे दिन के खेल के आखिरी कुछ घंटों में टीम इंडिया के पास नई गेंद लेने का भी मौका था लेकिन कोहली ने यहां पर भी चूक कर दी क्योंकि कोहली को भरोसा था कि उनके स्पिनर पुरानी गेंद से ही कुछ विकेट मेहमान टीम के निकाल लेंगे लेकिन ऐसा हुआ नही। जो रूट का विकेट 154वें ओवर में गिरा था तब मेहमान टीम का स्कोर 477 रन था इसके 6 ओवर के बाद भारतीय कप्तान के पास नई गेंद लेने का मौका था लेकिन विराट ने तीसरे दिन का इंतजार किया और इसका खामियाजा भारतीय टीमा को भुगतना पड़ा। रूट के आउट होने के बाद इंग्लैंड के तीन विकेट ने 101 रन जोडें।

रूट पर नही बना सके दबाव

चेन्नई टेस्ट में यदि आज मेहमान इंग्लैंड टीम मजबूत स्थिति में है तो इसका लगभग पूरा श्रेय जो रूट को जाता है। जो रूट का यह 100वां टेस्ट मैच था और रूट ने इसको यादगार बना दिया। अपने 100वें टेस्ट में रूट ने 218 रनों की एक शानदार पारी खेली। जो रूट स्पिनर्स को खेलने में माहिर हैं और अपने 218 रनों के की पारी में रूट को कोहली का भी शुक्रिया करना चाहिए क्योंकि रूट जब अपने शतक की ओर बढ़ रहे थे तो कोहली के द्वारा उनपर दबाव भी बनाने की कोशिश नही की गई और यह परिणाम सामने आए।

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